Durga

 
Lalita Mata Ji Ki Aarti

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।राजेश्वरी जय नमो नमः ॥ करुणामयी सकल अघ हारिणी ।अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥ अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी ।खल-दल नाशिनी नमो नमः ॥ भण्डासुर वधकारिणी जय माँ ।करुणा कलिते नमो नम: ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।श्री मातेश्वरी जय… Continue reading Lalita Mata Ji Ki Aarti

Sheetala Mata Ji Ki Aarti

जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता ।आदि ज्योति महारानी,सब फल की दाता ॥ॐ जय शीतला माता..॥ रतन सिंहासन शोभित,श्वेत छत्र भाता ।ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,जगमग छवि छाता ॥ ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । विष्णु सेवत ठाढ़े,सेवें शिव धाता ।वेद पुराण वरणत,पार नहीं पाता ॥ ॐ जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता । इन्द्र… Continue reading Sheetala Mata Ji Ki Aarti

Vindhyeshwari Mata Ji Ki Aati

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल ।ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे ।केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ नंगे पग मां… Continue reading Vindhyeshwari Mata Ji Ki Aati

Maa Durga Maa Kali Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली ।तेरे ही गुण गाये भारती,ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥ तेरे भक्त जनो पर,भीर पडी है भारी माँ ।दानव दल पर टूट पडो,माँ करके सिंह सवारी ।सौ-सौ सिंहो से बलशाली,अष्ट भुजाओ वाली,दुष्टो को पलमे संहारती ।ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥ अम्बे तू… Continue reading Maa Durga Maa Kali Aarti

Shri Deviji Ki Ji Aarti

जगजननी जय! जय!!माँ! जगजननी जय! जय!!भयहारिणि, भवतारिणि,माँ भवभामिनि जय! जय ॥जगजननी जय जय..॥ तू ही सत-चित-सुखमय,शुद्ध ब्रह्मरूपा ।सत्य सनातन सुन्दर,पर-शिव सुर-भूपा ॥जगजननी जय जय..॥ आदि अनादि अनामय,अविचल अविनाशी ।अमल अनन्त अगोचर,अज आनँदराशी ॥जगजननी जय जय..॥ अविकारी, अघहारी,अकल, कलाधारी ।कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि,हर सँहारकारी ॥जगजननी जय जय..॥ तू विधिवधू, रमा,तू उमा, महामाया ।मूल प्रकृति विद्या तू,तू… Continue reading Shri Deviji Ki Ji Aarti

Shri Durga Chalisa

नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥शशि ललाट मुख महाविशाला ।नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे ।दरश करत जन अति सुख पावे ॥ तुम संसार शक्ति लै कीना ।पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।तुम… Continue reading Shri Durga Chalisa