श्रीमद् भागवत महापुराण स्कन्ध 4 अध्याय 1

मैत्रेय उवाच
मनोस्तु शतरूपायां तिस्रः कन्याश्च जज्ञिरे ।
आकूतिर्देवहूतिश्च प्रसूतिरिति विश्रुताः ॥ १ ॥

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! स्वायम्भुव मनुके महारानी शतरूपासे प्रियव्रत और उत्तानपाद-इन दो पुत्रोंके सिवा तीन कन्याएँ भी हुई थीं; वे आकूति, देवहूति और प्रसूति नामसे विख्यात थीं ।।१।।
Srimatyajineśvaraṃ! Swyambhuva Manu had three daughters besides two sons, Priyavrata and Uttanapada; they were known by the names Akuti, Devahuti, and Prasuti..