श्रीपरीक्षिदुवाच
निवृत्तिमार्गः कथित आदौ भगवता यथा ।
क्रमयोगोपलब्धेन ब्रह्मणा यदसंसृतिः ॥ १ ॥
राजा परीक्षित्ने कहा-भगवन्! आप पहले (द्वितीय स्कन्ध) निवृत्तिमार्गका वर्णन कर चुके हैं तथा यह बतला चुके हैं कि उसके द्वारा अर्चिरादि मार्गसे जीव क्रमशः ब्रह्मलोकमें पहुँचता है और फिर ब्रह्माके साथ मुक्त हो जाता है ।।१।।
King Parikshit said – Oh Lord! You have already described the path of renunciation (second Skandha) and have explained that through it, through the path of Arciradi, a being gradually reaches Brahmaloka and then becomes liberated with Brahma..